कागजों में 'बहुरे दिन', ज़मीन पर जानलेवा बने पत्थर: ठेकेदार की मनमानी से 6 माह से अधर में संपर्क मार्ग का निर्माण
बढ़नी ,सिद्धार्थनगर: विकास के बड़े-बड़े दावों और भूमि पूजन की तस्वीरों के पीछे की जमीनी हकीकत देखनी हो, तो बढ़नी विकासखंड के गजेहड़ी उर्फ मधवानगर संपर्क मार्ग का रुख कर लीजिए। जिस मार्ग के निर्माण की घोषणा को '20 साल बाद दिन बहुरने' की तरह प्रचारित किया गया था, वह आज विभागीय उदासीनता और कार्यदायी संस्था की कथित लापरवाही के चलते ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब बन चुका है। भूमि पूजन हुए लगभग छह महीने बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा होना तो दूर, मार्ग पर बिखरी नुकीली गिट्टियां राहगीरों का इम्तिहान ले रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य शुरू होने के नाम पर पहले ठेकेदार द्वारा सड़क की खुदाई कर महीनों काम ठप रखा गया। धूल और गड्ढों से जूझ रहे लोगों ने जब आवाज उठाई, तो महज खानापूर्ति करते हुए सड़क पर बड़े और ऊबड़-खाबड़ पत्थर गिराकर छोड़ दिए गए। पिछले कई महीनों से काम फिर से पूरी तरह बंद पड़ा है। रोलिंग और डामरीकरण न होने के कारण यह संपर्क मार्ग अब एक खतरनाक ट्रैक में तब्दील हो चुका है।
सड़क पर बिखरे पत्थरों के कारण सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, मरीजों और दैनिक यात्रियों को उठानी पड़ रही है। दोपहिया वाहन अनियंत्रित होकर फिसल रहे हैं, जबकि ई-रिक्शा पलटने का खतरा लगातार बना रहता है। साइकिल चालकों को पैदल चलकर रास्ता पार करना पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, आए दिन राहगीर इन नुकीले पत्थरों पर गिरकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार तंत्र मूकदर्शक बना हुआ है।
गौरतलब है कि बढ़नी समय माता स्थान से मधवानगर होते हुए बैरिहवा तक लगभग 3.1 किलोमीटर लंबे इस संपर्क मार्ग के निर्माण के लिए करीब 2.46 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि स्वीकृत है। इसके बावजूद निर्माण की यह कछुआ चाल ठेकेदार की मनमानी और संबंधित विभाग के लचर पर्यवेक्षण को साफ उजागर करती है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क का डामरीकरण कर निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ पूरा नहीं कराया गया, तो वे उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपनी मांग को लेकर मुखर होंगे।