एनजीटी के आदेशों की धज्जियां उड़ा रही नगर पंचायत बढ़नी: कूड़ा निस्तारण केंद्र शोपीस, नहर की पटरियों पर कचरे में लगाई जा रही आग
बढ़नी (सिद्धार्थनगर)। नगर पंचायत बढ़नी में स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन के तमाम सरकारी दावे धरातल पर पूरी तरह हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। कस्बे में लाखों रुपये की लागत से कूड़ा निस्तारण व रीसाइक्लिंग केंद्र बाकायदा स्थापित होने के बावजूद नगर प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण करने के बजाय उसे खुलेआम सार्वजनिक स्थलों पर फूंका जा रहा है। कभी मिल कॉलोनी तो कभी घनी आबादी से सटी राप्ती मुख्य नहर की पटरियों पर कूड़े का अंबार लगाकर उसमें आग झोंक दी जाती है। इस आग से उठने वाले भयंकर काले और जहरीले धुएं के कारण पूरे क्षेत्र का वायुमंडल गंभीर रूप से प्रदूषित हो रहा है, जिससे आसपास के बाशिंदों का दम घुटने लगा है और बुजुर्गों व बच्चों में लगातार खांसी व सांस लेने की गंभीर तकलीफें पैदा हो रही हैं। हालात उस वक्त और भी भयावह हो जाते हैं जब आबादी से सटी राप्ती मुख्य नहर की पटरियों और राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 730) के समीप कचरा जलाया जाता है। यहां से उठने वाले घने धुएं का गुबार सीधे हाईवे तक फैल जाता है, जिससे मार्ग पर दृश्यता बेहद कम हो जाती है। इस मार्ग से गुजरने वाले पैदल यात्रियों, बाइक सवारों और वाहन चालकों का सांस लेना व आगे बढ़ना तक दूभर हो जाता है, जिससे हर पल किसी बड़े सड़क हादसे का अंदेशा बना रहता है। गौरतलब है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 के तहत खुले में कूड़ा और प्लास्टिक जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित व दंडनीय अपराध है, जिसके उल्लंघन पर भारी पर्यावरण मुआवजे और जिम्मेदारों पर विधिक दंडात्मक कार्रवाई का सख्त प्रावधान है। इसके अलावा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम और जनस्वास्थ्य को खतरे में डालने के तहत यह कृत्य सीधे तौर पर कानून का खुला उल्लंघन है। इसके बावजूद जिम्मेदार तंत्र अपनी आंखें मूंदे बैठा है और कूड़ा निस्तारण केंद्र को महज शोपीस बनाकर एनजीटी की गाइडलाइंस की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
इस गंभीर जनसमस्या और एनजीटी नियमों के खुले उल्लंघन के संबंध में जब अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत बढ़नी तथा उपजिलाधिकारी शोहरतगढ़ से उनका पक्ष जानने के लिए दूरभाष के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो फोन नहीं उठ पाने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो सका और उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो पाया।