बुंदेलखंड क्रांति दल ने मनाया काला दिवस, पृथक बुंदेलखंड राज्य के शीघ्र गठन की उठाई मांग बुंदेलखंड के विभाजन दिवस पर आयोजित सभा में आंदोलन को और गति देने का संकल्प
झांसी । बुंदेलखंड क्रांति दल के कार्यालय पर बुंदेलखंड राज्य के विखंडन की तिथि पर राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर सत्येन्द्र पाल सिंह की अध्यक्षता में कार्यालय पर सभा का आयोजन किया गया। कहा गया कि बुंदेलखंड के इतिहास में 12 मार्च 1948 का दिन विशेष महत्व रखता है। इसी दिन बुंदेलखंड राज्य का गठन किया गया था तथा नौगांव को इसकी राजधानी बनाया गया था। लेकिन 01 नवंबर 1956 को बुंदेलखंड राज्य का अस्तित्व समाप्त कर उसके क्षेत्र को आधा उत्तर प्रदेश और आधा मध्य प्रदेश में मिला दिया गया। बुंदेलखंड क्रांति दल इस दिन को बुंदेलखंड की राजनीतिक पहचान समाप्त किए जाने के विरोध में काला दिवस के रूप में मनाता है और पृथक बुंदेलखंड राज्य के पुनर्निर्माण की मांग करता है।
सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर सत्येन्द्र पाल सिंह ने कहा कि बुंदेलखंड की समस्याओं के स्थायी समाधान, क्षेत्र के विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय जनता के अधिकार के लिए पृथक बुंदेलखंड राज्य का निर्माण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड क्रांति दल इस मांग को लेकर अपने आंदोलन को और गति देगा तथा सभी लोगों से एकजुट होकर आंदोलन में सहयोग करने की अपील की।
उन्होंने बुंदेलखंड राज्य की मांग करने वाले सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, युवाओं, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों से व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर बुंदेलखंड के भविष्य के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।
सभा में उपस्थित सभी लोगों ने पृथक बुंदेलखंड राज्य के निर्माण की मांग को मजबूती से उठाने और आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाने का संकल्प व्यक्त किया।
सभा में मो. नईम मंसूरी, हरि नारायण श्रीवास्तव, अमर सिंह, प्रमोद सिंह शेखावत, शीलेन्द्र वर्मा (पूर्व प्रधानाचार्य),रमेश पाल (पूर्व प्रधानाचार्य), जगदीश विश्वकर्मा, गुलाब सिंह चौहान, श्रीमती शारदा शर्मा, लोकेंद्र परिहार, यशपाल परिहार, राहुल त्रिवेदी, अनवार अहमद, दुर्गा प्रसाद रायकवार, जुबेर खान, बृजकिशोर वर्मा, हरिशंकर शर्मा, लक्ष्मीनारायण श्रीवास, मो. आरिफ कमाल, अर्जुन चौहान, निखिल कुमार एवं नरेश कुमार सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सभा का संचालन मो. नईम मंसूरी ने किया।
सभा के अंत में बुंदेलखंड क्रांति दल ने संकल्प दोहराया कि पृथक बुंदेलखंड राज्य का निर्माण होने तक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा।