दरबारे सफवी का चार रोजा सालाना उर्स संपन्न, मुकर्रम वारसी की कव्वाली ने बांधा समां देर रात तक सजी महफिले समां, मुल्क की खुशहाली और आपसी भाईचारे के लिए मांगी गई दुआ
प्रयागराज। शाहनूर अलीगंज स्थित दरबारे सफवी का चार रोजा सालाना उर्स सोमवार को अकीदत और एहतराम के साथ संपन्न हुआ। समापन अवसर पर देर रात तक महफिले समां का आयोजन किया गया। भोपाल से आए हिंदुस्तान के मशहूर कव्वाल मुकर्रम वारसी ने अपनी शानदार कव्वाली से महफिल में समां बांध दिया। उनकी पेशकश सुनने के लिए देर रात तक अकीदतमंदों की मौजूदगी बनी रही। हकीम रिजवान हामिद सफवी साहब की सरपरस्ती में आयोजित उर्स के दौरान चार दिनों तक विभिन्न रस्में अदा की गईं। उर्स में अकीदतमंदों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सोमवार को हजरत मौलाना महबूब उल्लाह अलमारूफ हकीम मोहम्मद हामिद चिश्ती निजामी सफवी के उर्स की रस्में अदा की गईं। पुराना काला डांडा स्थित मजार-ए-अकदस पर सुबह गुस्ल और चादरपोशी की रस्म हुई। इसके बाद रात में आयोजित महफिले समां में मुकर्रम वारसी की कव्वाली आकर्षण का केंद्र रही।
उर्स में जबलपुर, गुजरात, भोपाल और मिर्जापुर समेत विभिन्न स्थानों से आए मेहमानों और अकीदतमंदों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान मुल्क की खुशहाली, तरक्की, अमन-चैन और आपसी भाईचारे के लिए खास तौर पर दुआ मांगी गई। लोगों ने देश में एकता, मोहब्बत और सौहार्द कायम रहने की कामना की। चार रोजा उर्स के समापन पर दरबारे सफवी का माहौल सूफियाना कलाम और अकीदत से सराबोर रहा। उर्स से जुड़ी रस्मों और महफिले समां में लोगों की भागीदारी ने आयोजन को खास
उर्स में जबलपुर, गुजरात, भोपाल और मिर्जापुर समेत विभिन्न स्थानों से आए मेहमानों और अकीदतमंदों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान मुल्क की खुशहाली, तरक्की, अमन-चैन और आपसी भाईचारे के लिए खास तौर पर दुआ मांगी गई। लोगों ने देश में एकता, मोहब्बत और सौहार्द कायम रहने की कामना की। चार रोजा उर्स के समापन पर दरबारे सफवी का माहौल सूफियाना कलाम और अकीदत से सराबोर रहा। उर्स से जुड़ी रस्मों और महफिले समां में लोगों की भागीदारी ने आयोजन को खास