सरकारी नौकरी में सफलता के लिए अनुशासन, निरंतरता और सही रणनीति जरूरी : अभिषेक सिंह जादौन बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बायोकेमिस्ट्री विभाग में सरकारी सेवाओं में करियर की संभावनाओं पर संगोष्ठी आयोजित
झाँसी। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल करने के लिए कठिन परिश्रम के साथ सही रणनीति, अनुशासन, निरंतरता और समय प्रबंधन बेहद जरूरी है। असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता का मूलमंत्र है। यह बात जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता अभिषेक सिंह जादौन ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बायोकेमिस्ट्री विभाग में आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी में कही।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के जे.सी. बोस जीवन विज्ञान विभाग के अंतर्गत बायोकेमिस्ट्री विभाग द्वारा स्नातक एवं स्नातकोत्तर के बाद सरकारी नौकरियां : करियर के अवसर, चुनौतियां और सफलता के मूलमंत्र विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. आलोक कुमार वर्मा के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में प्रो. डी.के. भट्ट मुख्य अतिथि तथा सहायक अभियंता अभिषेक सिंह जादौन मुख्य वक्ता रहे।
मुख्य वक्ता अभिषेक सिंह जादौन ने विद्यार्थियों को सिविल सेवा, इंजीनियरिंग सेवा, वैज्ञानिक अनुसंधान एवं विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में सरकारी नौकरी की संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन और लक्ष्य के प्रति समर्पण को आवश्यक बताया।
मुख्य अतिथि प्रो. डी.के. भट्ट ने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानकर लक्ष्य निर्धारित करने और उसके प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया। प्रो. आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियां विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ रोजगार के अवसरों और प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यावहारिक जानकारी भी प्रदान करती हैं।
संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने सरकारी नौकरियों, परीक्षा की तैयारी और करियर चयन से जुड़े सवाल पूछे, जिनका मुख्य वक्ता ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समाधान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। समापन पर अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर डॉ. अंजीता श्रीवास्तव, डॉ. सुमिरन श्रीवास्तव, डॉ. रमेश कुमार, डॉ. शाहिना कलीम, इंजी. अंजलि छोंकर एवं दिव्या जैन उपस्थित रहीं। आयोजन में अंकित रैकवार, सक्षम गुप्ता, मोहित साहू, साक्षी भारती एवं हर्षिता शर्मा ने विशेष सहयोग प्रदान किया। अंत में डॉ. सुमिरन श्रीवास्तव ने आभार व्यक्त किया।