पड़री में गांजा तस्कर से पुलिस का है मेल, वर्षों से चल रहा नोटों की गड्डी का खेल, बच्चों का भविष्य हो रहा फेल
मीरजापुर (अमरेश चंद्र पाण्डेय) । पड़री थाना क्षेत्र के देवाही गांव में गांजा तस्कर से पुलिस की वसूली का विडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा हैं, जिसमें पड़री पुलिस पर आरोप हैं कि गांजा तस्कर को पकड़ने पहुंची पुलिस उसे थाने ले जाने के बजाय उससे लाखों रुपये का सौदा कर वापस लौट गई। पुलिस ने मोटी रकम वसूलने के बाद तस्कर को छोड़ दिया। वीडियो में पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति के हाथ में नोटों की गड्डी दिखाई दे रही है। वह नोटों की गड्डी को सजाते हुए नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि इस वीडियो को तस्कर के परिजनों ने बनाया है। हालांकि, वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि देवाही गांव में पिछले करीब 14 वर्षों से गांजे की बिक्री की जा रही है। इस संबंध में कई बार पुलिस से शिकायत भी की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का दावा है कि गांजे का कारोबार लंबे समय से चल रहा है और इसकी वजह से गांव के कई परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं। लोगों का आरोप है कि पुलिस को इसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है। अब वसूली का वीडियो सामने आने के बाद पड़री पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में गांजे की बिक्री का असर अब बच्चों और युवाओं पर भी पड़ने लगा है। करीब 200 परिवार नशे की समस्या से प्रभावित हैं। स्थिति यह है कि 12 से 14 साल के बच्चे भी गांजे की लत का शिकार हो रहे हैं। कुछ बच्चे गांजा खरीदने के लिए घरों से रुपये तक चुराने लगे हैं। नशे की वजह से कई बच्चों की सेहत खराब हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ बच्चों का दमा और टीबी जैसी बीमारियों का इलाज भी चल रहा है। ऐसे बच्चे अपने परिवार पर बोझ बनते जा रहे हैं और परिवार उनकी हालत को लेकर परेशान हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ परिवार अपने बच्चों को नशे से बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पड़री पुलिस गांजे की कथित बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। लोगों का आरोप है कि यदि पुलिस समय रहते कार्रवाई करती तो कई परिवारों को बर्बाद होने से बचाया जा सकता था।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश को 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त बनाने का संकल्प दोहराया है। उन्होंने मादक पदार्थों की तस्करी और नशे के कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की नीति अपनाने पर जोर दिया है। उनका स्पष्ट संदेश है कि पैसों के लालच में युवाओं को नशे की अंधेरी दुनिया में धकेलने वाले तस्करों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे में देवाही गांव से सामने आया यह मामला नशामुक्त भारत अभियान के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े करता है। यदि पुलिस ईमानदारी से कार्रवाई करने का फैसला कर ले तो क्षेत्र में मादक पदार्थों की बिक्री पर रोक लग सकती है और न जाने कितने परिवारों को उजड़ने से बचाया जा सकता हैं।
पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष सोहन लाल श्रीमाली भी गांव-गांव जाकर लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक कर रहे हैं और नशामुक्त अभियान चलवा रहे हैं। वहीं जिले के आईजी और पुलिस अधीक्षक की ओर से भी मादक पदार्थों की बिक्री और तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
आईजी और एसपी के निर्देशों के बावजूद गांजे के कारोबार पर रोक लगाने के बजाय पुलिसकर्मी तस्करों से रुपये वसूलने में लगे हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, वायरल वीडियो की सत्यता सामने लाने और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना यह है कि पुलिस के उच्चाधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और देवाही गांव को गांजे के कथित कारोबार से मुक्ति दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
देवाही गांव के वरिष्ठजनों और सम्मानित लोगों ने पुलिस अधीक्षक अर्पणा रजत कौशिक से हाथ जोड़कर फरियाद की है कि पड़री पुलिस की लापरवाही से उनके परिवार उजड़ने की कगार पर हैं। गांव के 12 से 16 वर्ष तक के नाबालिग बच्चे गांजे के नशे की चपेट में आ रहे हैं। इनमें कई बच्चे अस्थमा (दमा) और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं और उनका इलाज चल रहा है। इस मामले में कई बार पड़री पुलिस से शिकायत और अनुरोध किया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि पड़री थाना मादक पदार्थ बिकवाने में सबसे बदनाम थाना हैं अब पड़री पुलिस के भरोसे बच्चों का भविष्य बचाना मुश्किल हो गया है। पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए पड़री थाने पर विशेष ध्यान दें, ताकि नाबालिग बच्चों को नशे से बचाया जा सके और परिवारों को उजड़ने से रोका जा सके।