मेजा एनटीपीसी संयंत्र की चिमनियों से निकलने वाले धुएं और उड़ती राख से ग्रामीणों के दैनिक जीवन पर सीधा पड़ रहा असर
मेजा प्रयागराज। ग्रामीणों का आरोप है कि मेजा एनटीपीसी संयंत्र की चिमनियों से निकलने वाले धुंए और उड़ती राख इस प्रदूषण से ग्रामीणों के दैनिक जीवन पर सीधा और दर्दनाक असर पड़ रहा है। हवा में तैरते राख के बारीक कण सांस के जरिए ग्रामीण के फेफड़ों में जमा हो रहा है। इससे महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों में दमा क्रोनिक ब्रिकाइटिस और सांस फूलने की समस्या आम बात हो चुकी है। लगातार खांसी और सीने में दर्द गांव में रहने वाले सूखी खांस, सीने में जकड़न से परेशान है। हवा में उड़ती राख जब आंखों में जाती है तो आखों में जलन खुजली और अंधापन या कम दिखने की समस्या पैदा हो रही है। शरीर पर रख की परत जमने और इस प्रदूषण वातावरण में रहने के कारण ग्रामीणों में खास खुजली और त्वचा के लाल चकत्ते होने की शिकायत बहुत बढ़ गई है। गांव में खुले कुएं तालाब और हैंडपंप के आसपास के जल स्रोत राख गिरने के कारण से जल प्रदूषित हो चुका है। घरों के भीतर रखे खाने-पीने की समान पर राख की बारीक परत जम जाती है जिसे शुद्ध खाना भी ग्रामीणों के लिए मुहाल हो गया है। किसानों की खेती की फसलों की उपज आधी रह गई है जिससे किसान कर्ज और आर्थिक तंगी के कारण दलदल में फंस रहे हैं। इस समस्या से परेशान होकर ग्रामीणों ने कई बार मेजा एनटीपीसी के जिम्मेदार अधिकारियों से लिखित शिकायत किया लेकिन इन तानाशाह अधिकारियों ने ग्रामीणों की एक भी बात नहीं सुनी और ना लिखित शिकायत पत्र पर ध्यान दिया। थक - हारकर ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन के माध्यम से शासन प्रशासन से शिकायत किया लेकिन समस्या का समाधान सिर्फ कागजों पर सीमित रह गया। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि ये समस्या दिन पर दिन बढ़ता जा रहा हैं। किसानों और गरीब ग्रामवासियों का कहना है कि इस समस्या पर भाजपा यूपी सरकार कितना निजाद दिलाएगी इसी आशा से आज किसान और ग्रामीणों का आशा बना हुआ है। ग्रामवासियों का कहना है कि इस समस्या पर रोक नही लगा तो आने वाले विधानसभा में सरकार को जबाब देने होगा।
मेजा एनटीपीसी की उड़ती राख
1. स्वास्थ्य पर गंभीर खतराः राख के महीन कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचने से लगातार खांसी, सांस फूलने, दमा और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ता है।
2. आंखों और त्वचा पर असरः राख के संपर्क से आंखों में जलन, खुजली, लालिमा तथा त्वचा पर खुजली और लाल चकत्तों की शिकायत हो सकती है।
3. पेयजल का प्रदूषणः राख के जलस्रोतों में पहुंचने से कुओं, तालाबों और हैंडपंपों के पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
4. खेती और फसल की बर्बादीः खेतों पर राख जमने से फसलों की वृद्धि और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। किसानों का दावा है कि पैदावार आधी तक रह गई है।
5. आर्थिक एवं सामाजिक संकटः बीमारी पर बढ़ता खर्च, खेती से घटती आमदनी और स्वच्छ भोजन-पानी की परेशानी ग्रामीण परिवारों को आर्थिक संकट की ओर धकेल रही है।
सबसे बड़ा सवालरू क्या बिजली उत्पादन की कीमत ग्रामीणों को अपने स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण और आजीविका से चुकानी पड़ेगी?
मेजा एनटीपीसी की उड़ती राख
1. स्वास्थ्य पर गंभीर खतराः राख के महीन कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचने से लगातार खांसी, सांस फूलने, दमा और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ता है।
2. आंखों और त्वचा पर असरः राख के संपर्क से आंखों में जलन, खुजली, लालिमा तथा त्वचा पर खुजली और लाल चकत्तों की शिकायत हो सकती है।
3. पेयजल का प्रदूषणः राख के जलस्रोतों में पहुंचने से कुओं, तालाबों और हैंडपंपों के पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
4. खेती और फसल की बर्बादीः खेतों पर राख जमने से फसलों की वृद्धि और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। किसानों का दावा है कि पैदावार आधी तक रह गई है।
5. आर्थिक एवं सामाजिक संकटः बीमारी पर बढ़ता खर्च, खेती से घटती आमदनी और स्वच्छ भोजन-पानी की परेशानी ग्रामीण परिवारों को आर्थिक संकट की ओर धकेल रही है।
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