महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की पुण्य तिथि पर पूजन, हवन संपन्न शासी निकाय के अध्यक्ष पंकज जायसवाल की अध्यक्षता में हुआ कार्यक्रम
प्रयागराज। आर्य कन्या डिग्री कॉलेज में आज महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की पुण्य तिथि के अवसर पर श्रद्धापूर्वक हवन-यज्ञ का आयोजन आज किया गया। यह कार्यक्रम शासी निकाय के अध्यक्ष पंकज जायसवाल के कर कमलों से पूर्ण विधि-विधान से संपन्न हुआ।
हवन-यज्ञ में प्राचार्या प्रो अर्चना पाठक, प्रो ममता गुप्ता एवं चीफ प्रॉक्टर डॉ रंजना त्रिपाठी ने मुख्य श्होताश् के रूप में आहुतियां दीं।
इस अवसर पर महर्षि दयानंद सरस्वती के अनन्य योगदानों को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अध्यक्ष शासी निकाय पंकज जायसवाल ने हवन की वैज्ञानिकता, हवन की सही क्रियाविधि, आर्य समाज की परोपकारिणी सभा की महत्ता पर प्रकाश डाला। परोपकारिणी सभा समय अनुकूल नियमों और सिद्धांतों में परिवर्तन करने की शक्ति रखती है यह आर्य समाज को जड़ होने से रक्षा करती है। शिक्षक और शिक्षिकाओं ने आर्य समाज के संस्थापक, महान समाज सुधारक और स्वतंत्रता संग्राम के प्रणेता महर्षि दयानंद सरस्वती ने 30 अक्टूबर 1883 को ईश्वर का स्मरण करते हुए, हिन्दी भाषा के प्रयोग, स्त्री सशक्तिकरण, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन में उनकी भूमिका को याद किया और प्रेरणा ली। उनके आदर्श एवं विचार आज भी अनुकरणीय हैं।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की उप-प्राचार्या प्रो इभा सिरोठिया, प्रो अंजू श्रीवास्तव, डॉ ज्योति रानी जायसवाल, डॉ श्रुति आनंद, डॉ मुदिता, डॉ चित्रा चैरसिया, डॉ शशी, डॉ निशा खन्ना, डॉ हेमलता श्रीवास्तव, डॉ शिखा कुमारी, डॉ नाजनीन, डॉ अमित पांडेय, डॉ अमित शुक्ला, डॉ श्याम कान्त तथा आर्य कन्या इंग्लिश मीडियम इंटरमीडिएट कॉलेज की प्राचार्या श्रीमती ऋचा अवस्थी सहित बडी संख्या में शिक्षक, शिक्षिकाएं और कर्मचारी शामिल हुए।
हवन-यज्ञ में प्राचार्या प्रो अर्चना पाठक, प्रो ममता गुप्ता एवं चीफ प्रॉक्टर डॉ रंजना त्रिपाठी ने मुख्य श्होताश् के रूप में आहुतियां दीं।
इस अवसर पर महर्षि दयानंद सरस्वती के अनन्य योगदानों को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। अध्यक्ष शासी निकाय पंकज जायसवाल ने हवन की वैज्ञानिकता, हवन की सही क्रियाविधि, आर्य समाज की परोपकारिणी सभा की महत्ता पर प्रकाश डाला। परोपकारिणी सभा समय अनुकूल नियमों और सिद्धांतों में परिवर्तन करने की शक्ति रखती है यह आर्य समाज को जड़ होने से रक्षा करती है। शिक्षक और शिक्षिकाओं ने आर्य समाज के संस्थापक, महान समाज सुधारक और स्वतंत्रता संग्राम के प्रणेता महर्षि दयानंद सरस्वती ने 30 अक्टूबर 1883 को ईश्वर का स्मरण करते हुए, हिन्दी भाषा के प्रयोग, स्त्री सशक्तिकरण, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन में उनकी भूमिका को याद किया और प्रेरणा ली। उनके आदर्श एवं विचार आज भी अनुकरणीय हैं।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की उप-प्राचार्या प्रो इभा सिरोठिया, प्रो अंजू श्रीवास्तव, डॉ ज्योति रानी जायसवाल, डॉ श्रुति आनंद, डॉ मुदिता, डॉ चित्रा चैरसिया, डॉ शशी, डॉ निशा खन्ना, डॉ हेमलता श्रीवास्तव, डॉ शिखा कुमारी, डॉ नाजनीन, डॉ अमित पांडेय, डॉ अमित शुक्ला, डॉ श्याम कान्त तथा आर्य कन्या इंग्लिश मीडियम इंटरमीडिएट कॉलेज की प्राचार्या श्रीमती ऋचा अवस्थी सहित बडी संख्या में शिक्षक, शिक्षिकाएं और कर्मचारी शामिल हुए।