असर सर्वेक्षण के अंतर्गत विद्यालय पहुंचीं डीएलएड प्रशिक्षु, बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता परखी कक्षा दो के बच्चों से कराया अनुच्छेद वाचन, गणित के जोड़ संबंधी सवाल पूछकर जांची दक्षता
कौशाम्बी। जनपद के चयनित 30 गांवों में चल रहे असर सर्वेक्षण के अंतर्गत सोमवार को डीएलएड प्रशिक्षु प्रियांशी सिंह और श्वेता सरोज ने प्राथमिक विद्यालय हिसामपुर परसखी पहुंचकर बच्चों की शैक्षिक दक्षता का आकलन किया। इस दौरान प्रशिक्षुओं ने निर्धारित सर्वेक्षण प्रपत्र के आधार पर बच्चों की पठन क्षमता, गणितीय समझ और बुनियादी शैक्षिक स्तर की जानकारी जुटाई। सर्वेक्षण का उद्देश्य बच्चों की वास्तविक शैक्षिक स्थिति का आकलन करना और उनकी बुनियादी दक्षताओं को परखना रहा।
सर्वेक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं ने अलग-अलग कक्षाओं में पहुंचकर बच्चों से निर्धारित स्तर के अनुसार सवाल पूछे और उनकी शैक्षिक समझ को परखा। कक्षा दो की छात्रा शालिनी देवी और छात्र मोहित से अनुच्छेद का वाचन कराया गया। दोनों बच्चों ने बिना किसी विशेष कठिनाई के अनुच्छेद पढ़कर सुनाया। इसके बाद उनकी गणितीय दक्षता जांचने के लिए जोड़ से संबंधित सवाल पूछे गए, जिनका बच्चों ने सही जवाब दिया। वहीं कक्षा एक के बच्चों से वाक्यांश पढ़वाकर उनकी शुरुआती पठन क्षमता का परीक्षण किया गया। इस दौरान आर्यस ने वाक्यांश पढ़कर सुनाया।
प्रशिक्षुओं ने बच्चों से बातचीत करते हुए यह भी समझने का प्रयास किया कि वे लिखित शब्दों और वाक्यों को किस तरह समझते हैं तथा गणित के सामान्य सवालों को हल करने में कितने सक्षम हैं। बच्चों को दिए गए सवालों के जवाब, पढ़ने की गति, शब्दों की पहचान और गणितीय समझ के आधार पर उनकी दक्षता का आकलन किया गया। सर्वेक्षण से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां निर्धारित प्रपत्र में दर्ज की गईं।
असर सर्वेक्षण के तहत केवल विद्यालय में नामांकित बच्चों की उपस्थिति या कक्षावार स्थिति ही नहीं, बल्कि उनके वास्तविक सीखने के स्तर को भी समझने पर जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से बच्चों की बुनियादी पढ़ने और गणित करने की क्षमता से जुड़ी जमीनी स्थिति सामने आती है। सोमवार को विद्यालय में हुए सर्वेक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं ने विभिन्न शैक्षिक गतिविधियों के जरिए बच्चों की दक्षता परखी। कई घंटे तक चले इस सर्वेक्षण में विद्यालय के शैक्षिक वातावरण और बच्चों के सीखने के स्तर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्रित की गईं।
सर्वेक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं ने अलग-अलग कक्षाओं में पहुंचकर बच्चों से निर्धारित स्तर के अनुसार सवाल पूछे और उनकी शैक्षिक समझ को परखा। कक्षा दो की छात्रा शालिनी देवी और छात्र मोहित से अनुच्छेद का वाचन कराया गया। दोनों बच्चों ने बिना किसी विशेष कठिनाई के अनुच्छेद पढ़कर सुनाया। इसके बाद उनकी गणितीय दक्षता जांचने के लिए जोड़ से संबंधित सवाल पूछे गए, जिनका बच्चों ने सही जवाब दिया। वहीं कक्षा एक के बच्चों से वाक्यांश पढ़वाकर उनकी शुरुआती पठन क्षमता का परीक्षण किया गया। इस दौरान आर्यस ने वाक्यांश पढ़कर सुनाया।
प्रशिक्षुओं ने बच्चों से बातचीत करते हुए यह भी समझने का प्रयास किया कि वे लिखित शब्दों और वाक्यों को किस तरह समझते हैं तथा गणित के सामान्य सवालों को हल करने में कितने सक्षम हैं। बच्चों को दिए गए सवालों के जवाब, पढ़ने की गति, शब्दों की पहचान और गणितीय समझ के आधार पर उनकी दक्षता का आकलन किया गया। सर्वेक्षण से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां निर्धारित प्रपत्र में दर्ज की गईं।
असर सर्वेक्षण के तहत केवल विद्यालय में नामांकित बच्चों की उपस्थिति या कक्षावार स्थिति ही नहीं, बल्कि उनके वास्तविक सीखने के स्तर को भी समझने पर जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से बच्चों की बुनियादी पढ़ने और गणित करने की क्षमता से जुड़ी जमीनी स्थिति सामने आती है। सोमवार को विद्यालय में हुए सर्वेक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं ने विभिन्न शैक्षिक गतिविधियों के जरिए बच्चों की दक्षता परखी। कई घंटे तक चले इस सर्वेक्षण में विद्यालय के शैक्षिक वातावरण और बच्चों के सीखने के स्तर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्रित की गईं।